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श्रमिकों की वापसी के लिए सबसे ज्यादा ट्रेनें UP-बिहार में चल रही, बंगाल में सबसे कम.

लॉकडाउन में फंसे मजदूरों में घर वापसी करने वाले हर चार में से तीन श्रमिक यूपी और बिहार के हैं. इसके अलावा रेल मंत्रालय के द्वारा 73 फीसदी ट्रेनों का संचालन इन्हीं दोनों राज्यों में हो रहा है जबकि सबसे कम ट्रेन तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए चल रही हैं.

Special Trains In Lockdown

  • यूपी में अभी तक 172 श्रमिक ट्रेन मिली
  • बिहार को 100 श्रमिक ट्रेन रेलवे ने दिया
  • बंगाल को दो और तमिलनाडु को 1 ट्रेन

कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचने में जुटी श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए चल रही हैं. घर वापसी करने वाले हर चार में से तीन श्रमिक यूपी और बिहार के हैं और 73 फीसदी ट्रेनों का संचालन इन्हीं दोनों राज्यों में हो रहा है जबकि सबसे कम ट्रेन तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए चल रही हैं.

रेल मंत्रालय ने कहा कि रेलवे ने सोमवार दोपहर तक देश भर के विभिन्न राज्यों से कुल 468 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं, जिनमें से 363 ट्रेनें अपने गंतव्य तक पहुंच भी चुकी हैं और 105 ट्रेनें फि‍लहाल अपने-अपने गंतव्यों की ओर अग्रसर हैं. यूपी-बिहार के अलावा मध्य प्रदेश, ओडिशा और झारखंड को अन्य राज्यों की तुलना में अधिक ट्रेनें मिलीं.

कब और कहां से चलेगी ट्रेन, कितनी जगह रुकेगी? रेलवे ने जारी की पूरी लिस्ट.

रेल मंत्रालय ने कहा कि गंतव्य तक पहुंच चुकीं 363 श्रमिक ट्रेन में से अधिकतम 172 ट्रेनें उत्तर प्रदेश गई हैं और 100 ट्रेनें बिहार गई हैं. मध्य प्रदेश को 33 ट्रेनें, ओडिशा को 25 और झारखंड को 22 ट्रेनें मिलीं. तमिलनाडु. आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश को एक-एक ट्रेन मिली जबकि महाराष्ट्र को तीन ट्रेनें और राजस्थान को चार ट्रेनें मिली हैं. इसके अलावा तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को दो-दो ट्रेनें मिली हैं.

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इन स्‍पेशल ट्रेनों ने प्रवासियों को अनेक शहरों तक पहुंचाया है जिनमें तिरुचिरापल्ली, टिटलागढ़, बरौनी, खंडवा, जगन्नाथपुर, खुर्दा रोड, प्रयागराज, छपरा, बलिया, गया, पूर्णिया, वाराणसी, दरभंगा, गोरखपुर, लखनऊ, जौनपुर, हटिया, बस्ती, कटिहार, दानापुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा इत्‍यादि शामिल हैं. इससे साफ जाहिर है कि घर वापसी करने वाले मजदूरों में सबसे ज्यादा यूपी-बिहार के हैं.

इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में, अधिकतम 1,200 यात्री सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए यात्रा कर सकते हैं. इसी तरह ट्रेन में चढ़ने से पहले यात्रियों की समुचित स्‍क्रीनिंग या जांच सुनिश्चित की जाती है. एक और विशेष बात यह है कि इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से सफर के दौरान यात्रियों को भोजन-पानी दिया जाता है.

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